शाम

शाम

वो शाम बेकरार सी थी

तुम्हारी यादें बेशुमार सी थी

लेकिन बस अब तुम पास नहीं थी

वो जाम, वो कुर्सी, वो बारजा,

और बस, वो शाम बीमार सी थी

जो मेरे जज्बातों पर

कुछ हावी सी थी

उस शाम जो 

तुम मेरे साथ नहीं थी

क्या बताएं, वो शाम ही

बेकरार सी थी

                   ~ S

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